शहीद जवानो की पहचान करने के लिए अपनाया गया था ये तरीका, जान कर दहल जाएगा मन
ये तो सब जानते है कि पुलवामा हमले में जो ब्लास्ट हुआ था, उसमे न केवल सीआरपीएफ की जवानो की बस के बल्कि उनके अपने शरीर के भी टुकड़े टुकड़े हो गए थे। बता दे कि पुलवामा हमले के बाद शहीद जवानो की पहचान करने के लिए कई तरह के तरीके अपनाएं गए थे। दरअसल ये ब्लास्ट इतना ज्यादा बड़ा था कि चालीस के चालीस जवानो का शरीर बुरी तरह से जल गया था। ऐसे में उनके चेहरे से उनकी पहचान करना काफी मुश्किल हो गया था। यही वजह है कि शहीद जवानो की पहचान करने के लिए ये रास्ते अपनाएं गए थे। ताकि उनके पार्थिव शरीर को उनके परिवार तक पहुँचाया जा सके।

शहीद जवानो की पहचान..
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आपको जान कर हैरानी होगी कि इनमे से कुछ शहीद जवानो की पहचान उनके आधार कार्ड, आईडी कार्ड से की गई थी। इसके इलावा उन जवानो ने जो सामान पहन रखा था, उससे भी कई जवानो की पहचान की गई थी। अगर वहां मौजूद अधिकारियों की माने तो यह विस्फोट इतना भयानक था कि सभी शहीदों के शारीरिक अंग तक बिखर चुके थे। ऐसे में उनके शवों की पहचान करना वास्तव में बेहद मुश्किल और कठिन काम था। यहाँ तक कि जब जवानो के शवों की पहचान की जा रही थी, तब वहां मौजूद हर व्यक्ति की रूह कांपने लगी थी।
जी हां वहां का नजारा सच में बेहद खराब था। गौरतलब है कि पुलवामा हमले के बाद कुछ जवानो के सीआरपीएफ आईडी कार्ड देख कर उन्हें पहचाना गया था। तो वही कुछ जवानो की जेब और बैग में छुट्टी का आवेदन पत्र भी मौजूद था। इसके इलावा कुछ जवानो की पहचान उनकी कलाई में बंधी घड़ियों और पर्स से भी की गई थी। जी हां ये सब सामान उनके साथी अधिकारियों ने पहचाना था।
हालांकि यहाँ अफ़सोस की बात ये है कि जिन लोगो ने अपने परिवार के चिराग को खोया है, जब उनके घर पर शहीदों के पार्थिव शरीर की बजाय केवल शहीदों के शरीर के कुछ चंद टुकड़े पहुंचे होंगे, तब उनके मन पर क्या बीती होगी।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



